कोलकाता के अलीपुर इलाके में एक सरकारी नौ मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने करीब 4000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वीवीपैट को नष्ट कर दिया है। ये मशीनें हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई थीं। इस हादसे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

घटना का विवरण और आग की शुरुआत

दक्षिण 24 परगना जिला परिषद के दफ्तर वाली इस इमारत में आग बुधवार को लगी। अग्निशमन मंत्री कौशिक चौधरी ने मौके पर पहुंचकर बताया कि आग सबसे पहले दूसरी और तीसरी मंजिल पर दिखाई दी। ऊपरी मंजिलों पर रखी मशीनें पूरी तरह जल गईं। आग बुझाने में करीब 24 घंटे लगे। मंत्री ने इसे सामान्य आग नहीं बताया और सबोटाज की संभावना जताई है।

अरिंदम नियोगी की 9 पन्नों की रिपोर्ट में मुख्य बातें

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरिंदम नियोगी ने 12 जून 2026 को खुद घटनास्थल का दौरा किया। जिला अधिकारियों के साथ हुई इस जांच के बाद उन्होंने चुनाव आयोग को विस्तृत 9 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अभी नुकसान की सटीक सीमा का आकलन संभव नहीं है। फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही असली नुकसान और कारण पता चल पाएगा।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है। पुलिस ने वहां किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। रिपोर्ट चुनाव आयोग को प्राथमिक जानकारी देने वाली है, जबकि दूसरी विस्तृत रिपोर्ट फोरेंसिक निष्कर्षों के बाद भेजी जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और संदेह

इस घटना पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने इसे सबूतों के नष्ट करने की साजिश बताया। वहीं, सत्ताधारी पक्ष ने कहा कि जांच चल रही है और सच्चाई सामने आएगी। ईवीएम 10 विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित थीं, जहां चुनाव परिणाम पहले ही घोषित हो चुके हैं।

पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की गई है। फोरेंसिक टीम मौके पर सबूत जुटा रही है।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

ये ईवीएम हालिया चुनाव में इस्तेमाल हुई थीं, जहां भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया था। मशीनों के नष्ट होने से भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में सबूत उपलब्ध न होने का मुद्दा उठ सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग का मानना है कि परिणामों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा जब तक अदालत अन्यथा न कहे।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

चुनाव के बाद मशीनों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। मंत्री चौधरी ने कहा कि आग की लपटें कैसे ऊपरी मंजिलों तक पहुंचीं, इसकी जांच की जा रही है।

निष्कर्ष: अलीपुर की इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट आने तक सभी की निगाहें चुनाव आयोग और प्रशासन पर टिकी हैं। सही जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय किए जा सकेंगे।