नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी डिजिटल सेवा प्रदाता कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड अब शेयर बाजार में कदम रखने की तैयारी में है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस इकाई ने बाजार नियामक सेबी के समक्ष मसौदा दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। लगभग 37,700 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के साथ जियो देश का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम पेश करने जा रही है। यह कदम न केवल कंपनी के भविष्य को मजबूत बनाएगा बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
आईपीओ के जरिए 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना
जियो प्लेटफॉर्म्स के मसौदा दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी आईपीओ के तहत 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी। यह कुल इक्विटी पूंजी का करीब 2.9 प्रतिशत होगा। आईपीओ से जुटाई गई शुद्ध राशि का उपयोग मुख्य रूप से प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) के बकाया कर्जों के पूर्ण या आंशिक भुगतान तथा सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस निर्गम से कंपनी करीब 37,700 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद कर रही है। इस राशि के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन लगभग 137 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। आईपीओ से प्राप्त धनराशि में से करीब 27,500 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने और अन्य कंपनी संबंधी जरूरतों पर खर्च किए जाएंगे। यह रणनीति कंपनी को वित्तीय रूप से और अधिक मजबूत बनाएगी तथा भविष्य के विस्तार के लिए मंच तैयार करेगी।
देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की संभावना
यदि यह आईपीओ सफल रहा तो यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम साबित होगा। इससे पहले कई बड़ी कंपनियों ने बाजार से धन जुटाया है, लेकिन जियो का यह कदम अपने आप में अनोखा होगा। मुकेश अंबानी की दूरदर्शिता के कारण जियो ने पिछले कुछ वर्षों में टेलीकॉम क्षेत्र में क्रांति ला दी है। सस्ती डेटा और बेहतर सेवाओं के जरिए करोड़ों भारतीयों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने वाली यह कंपनी अब अगले चरण की तैयारी कर रही है।
आईपीओ के बाद कंपनी की बाजार हिस्सेदारी और मजबूत होगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जियो का मजबूत बिजनेस मॉडल, विशाल यूजर बेस और निरंतर बढ़ती आय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इश्यू न केवल रिलायंस समूह बल्कि पूरे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
पहले भी जुटाई जा चुकी है भारी भरकम रकम
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से पहले भी वैश्विक निवेशकों से भारी पूंजी जुटा चुकी है। वर्ष 2020 में कंपनी ने फेसबुक की मूल कंपनी मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 43,574 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। इसी वर्ष गूगल से 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 33,737 करोड़ रुपये जुटाए गए।
इसके अलावा, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक निवेशकों से करीब 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले लगभग 74,745 करोड़ रुपये जुटाए गए। इन निवेशों ने कंपनी को मजबूत नींव प्रदान की है।
वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार है। यह आईपीओ 2008 के बाद रिलायंस समूह का पहला सार्वजनिक निर्गम होगा। साथ ही, समूह के अंदर किसी उपभोक्ता केंद्रित कंपनी का यह पहला आईपीओ होगा।
जियो की यात्रा और डिजिटल भारत पर प्रभाव
मुकेश अंबानी के विजन के तहत शुरू हुई जियो ने भारतीय टेलीकॉम उद्योग को पूरी तरह बदल दिया। 2016 में लॉन्च के बाद से कंपनी ने सस्ती इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराकर करोड़ों लोगों का जीवन आसान बनाया। आज जियो न केवल मोबाइल सेवाएं बल्कि ब्रॉडबैंड, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य टेक्नोलॉजी आधारित सेवाएं भी प्रदान करती है।
आईपीओ से प्राप्त धन का उपयोग कर्ज कम करने के साथ-साथ 5G, डेटा सेंटर और अन्य उभरती टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए किया जा सकता है। यह कदम कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल सेक्टर की बढ़ती भूमिका को देखते हुए जियो का यह कदम कई नए अवसर पैदा करेगा।
निवेशकों की नजर अब इस आईपीओ पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि मजबूत बुनियादी ढांचे और भविष्य की योजनाओं के कारण यह इश्यू निवेशकों के बीच लोकप्रिय रहेगा। कंपनी की पारदर्शी नीतियां और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस भी विश्वास बढ़ाने वाले कारक हैं।
भारतीय पूंजी बाजार के लिए नया अध्याय
यह आईपीओ न केवल जियो के लिए बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। बड़े पैमाने पर फंड जुटाने से बाजार में नई ऊर्जा आएगी और अन्य कंपनियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को मजबूती देने वाली जियो जैसी कंपनियां देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
आईपीओ प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत होगी। इससे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही, रोजगार सृजन और टेक्नोलॉजी इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।