पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये, डीजल पर जीरो: उपभोक्ताओं को कितनी राहत?

केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी है। ईरान युद्ध और हार्मुज संकट से क्रूड ऑयल 122 डॉलर तक पहुंचने पर लिया गया यह फैसला आम आदमी को अंतरराष्ट्रीय उछाल से बचाने का प्रयास है। जानिए रिटेल कीमतों पर क्या असर पड़ेगा और सरकार की तैयारी क्या है।

Darshan Jat
Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor
Mar 27, 2026 • 10:06 AM  1  0
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1 day ago
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये, डीजल पर जीरो: उपभोक्ताओं को कितनी राहत?
केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी है। ईरान युद्ध और हार्मुज संकट से क्रूड ऑयल 122 डॉलर तक पहुंचने पर लिया गया यह फैसला आम आदमी को अंतरराष्ट्रीय उछाल से बचाने का प्रयास है। जानिए रिटेल कीमतों पर क्या असर पड़ेगा और सरकार की तैयारी क्या है।
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पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये, डीजल पर जीरो: उपभोक्ताओं को कितनी राहत?
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये, डीजल पर जीरो: उपभोक्ताओं को कितनी राहत?

ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध और हार्मुज जलडमरूमध्य के अवरोध ने वैश्विक क्रूड ऑयल कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है। अब पेट्रोल पर केंद्र का टैक्स महज 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। इस फैसले का मकसद आम उपभोक्ताओं को महंगाई के बोझ से बचाना है।

सरकार का बड़ा फैसला: नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय संकट से सुरक्षा

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस उछाल का असर दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50 फीसदी, उत्तरी अमेरिका में 30 फीसदी, यूरोप में 20 फीसदी और अफ्रीका में 50 फीसदी तक देखा गया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी काट दी है।

पुरी ने कहा, "सरकार के पास दो रास्ते थे—या तो आम लोगों पर बोझ डालना या अपने वित्तीय संसाधनों पर असर सहना। हमने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद अपनाई नीति को जारी रखते हुए नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।" यह कदम चार साल से चली आ रही नागरिक-केंद्रित नीति का हिस्सा है, जिसमें सरकार अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का बोझ खुद उठाती है।

क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? ओएमसी घाटे का असर

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी में इस कटौती का पूरा फायदा आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाएगा। तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) फिलहाल प्रति लीटर 48.8 रुपये तक का घाटा उठा रही हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर जाने के बाद यह नुकसान और बढ़ गया है। कटौती का बड़ा हिस्सा इन घाटों को भरने में लग जाएगा।

निजी क्षेत्र की कंपनी नायरा एनर्जी ने गुरुवार को ही पेट्रोल में 5.3 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। वहीं सरकारी कंपनियां अभी भी कीमतें स्थिर रखे हुए हैं, लेकिन निजी क्षेत्र में दबाव साफ दिख रहा है। उपभोक्ताओं को राहत सीमित रह सकती है, क्योंकि कंपनियां घाटे की भरपाई पर फोकस कर रही हैं।

हार्मुज जलडमरूमध्य संकट: भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर

हार्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। युद्ध से पहले यहां से रोजाना 20-25 मिलियन बैरल क्रूड और बड़ी मात्रा में गैस गुजरती थी। भारत अपनी 40-50 फीसदी क्रूड आयात और 16-17 फीसदी एलएनजी इसी रास्ते से लाता है। कतर और ईरान से एलपीजी आयात भी प्रभावित हुआ है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि तत्काल कोई संकट नहीं है। देश में 60 दिनों का तेल स्टॉक और 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है। जूनियर पेट्रोलियम मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि रणनीतिक भंडारों में 3.372 मिलियन टन क्रूड रखा गया है, जो कुल क्षमता का दो-तिहाई है। कुल रिजर्व 74 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। मंत्री पुरी ने भी लोकसभा में आश्वासन दिया कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या ईंधन की कोई कमी नहीं है।

सरकार की रणनीति: आयात विविधीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाना

सरकार ने क्रूड और एलपीजी आयात के नए स्रोतों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। एलपीजी के घरेलू उत्पादन को 25 फीसदी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पैनिक बाइंग की अफवाहों को जानबूझकर फैलाया गया प्रचार बताया गया है। हरदीप सिंह पुरी ने जोर देकर कहा कि गरीब और सामान्य परिवारों की रसोई पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

नायरा एनर्जी जैसी निजी कंपनियों की बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां उपभोक्ता हितों की रक्षा करने की कोशिश में जुटी हैं। सरकार ने 70 फीसदी क्रूड आयात को हार्मुज से अलग स्रोतों पर शिफ्ट कर लिया है, जो पहले 55 फीसदी था। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है।


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