अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें: ₹40,000 करोड़ के लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली!

अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों से जुड़े ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 8 मई तक के लिए टाल दी है. पूर्व नौकरशाह ई. ए. एस. शर्मा ने इस मामले में अदालत की निगरानी में जांच की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की है.

Darshan Jat
Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor
Apr 30, 2026 • 11:42 PM  0  0
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अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें: ₹40,000 करोड़ के लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली!
अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों से जुड़े ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 8 मई तक के लिए टाल दी है. पूर्व नौकरशाह ई. ए. एस. शर्मा ने इस मामले में अदालत की निगरानी में जांच की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की है.
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अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें: ₹40,000 करोड़ के लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली!
अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें: ₹40,000 करोड़ के लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली!

अनिल अंबानी की बढ़ी मुसीबत! लोन धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई

उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उसकी कंपनियों से जुड़े एक बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 8 मई तक के लिए स्थगित कर दी है. यह मामला ₹40,000 करोड़ से भी ज़्यादा के कथित ऋण धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसकी अदालत की निगरानी में जांच की मांग की जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला पूर्व नौकरशाह ई. ए. एस. शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है. इस याचिका में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर ₹40,000 करोड़ से अधिक के ऋण धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस एडीए समूह की कई कंपनियों में सार्वजनिक धन का व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग, वित्तीय विवरणों में हेराफेरी और संस्थागत मिलीभगत हुई है.

नवंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सीबीआई, ईडी, अनिल अंबानी और अन्य को नोटिस जारी किए थे और तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था. जांच एजेंसियों पर इस बड़े बैंकिंग घोटाले में बैंकों और उनके अधिकारियों की कथित मिलीभगत की जांच न करने का आरोप भी लगाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची की पीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. सुनवाई की शुरुआत में, सीबीआई और ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियों ने 23 मार्च को जारी निर्देशों के अनुसार मामले की नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है. हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने एक बार फिर इस बात पर ज़ोर दिया कि मुख्य आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है.

याचिकाकर्ता का क्या कहना है?

जनहित याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा, “सीबीआई और ईडी ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी हैं. मुख्य आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है. अनिल अंबानी को मुख्य आरोपित के रूप में पहचाना गया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.'' उन्होंने जांच एजेंसियों पर इस बड़े बैंकिंग घोटाले में बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया है.

केंद्रीय एजेंसियों का रुख

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता के वकील के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा, “मैं इस बात का जवाब नहीं दे सकता कि 'एक्स' या 'वाई' को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है. हमने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी हैं.'' इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी द्वारा जांच में दिखाए गए 'ढीले-ढाले रवैये' पर असंतोष व्यक्त किया था और उन्हें 'निष्पक्ष, तटस्थ, पारदर्शी और समयबद्ध' जांच करने का निर्देश दिया था.

अनिल अंबानी को लगे झटके

अप्रैल 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को एक और झटका दिया था, जब उसने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसमें बैंकों को आरबीआई के 2024 के मास्टर निर्देशों के तहत उनके ऋण खातों को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति दी गई थी. इस फैसले के बाद, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो बैंक इस कार्रवाई को आगे बढ़ा सकते हैं.

इसके अलावा, अप्रैल 2026 में ही, अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी ने गिरफ्तार किया था. हालांकि, रिलायंस ग्रुप ने स्पष्ट किया कि इन दोनों अधिकारियों ने सितंबर और दिसंबर 2019 में ही समूह छोड़ दिया था.

मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor

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