अब पेट्रोल-डीजल नहीं, 'पानी' से चलेंगी गाड़ियां? मोनाको की कंपनी का बड़ा दावा!

मोनाको की कंपनी FOWE Eco Solutions ने 'कैविटेक फ्यूल इमल्शन' नामक एक नई तकनीक पेश की है, जो पानी का उपयोग करके ईंधन की खपत को 10% तक कम करने और हानिकारक उत्सर्जन को घटाने का दावा करती है. यह तकनीक भारत जैसे देशों के लिए तेल आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है.

Darshan Jat
Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor
May 17, 2026 • 5:20 PM  0  0
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7 hours ago
अब पेट्रोल-डीजल नहीं, 'पानी' से चलेंगी गाड़ियां? मोनाको की कंपनी का बड़ा दावा!
मोनाको की कंपनी FOWE Eco Solutions ने 'कैविटेक फ्यूल इमल्शन' नामक एक नई तकनीक पेश की है, जो पानी का उपयोग करके ईंधन की खपत को 10% तक कम करने और हानिकारक उत्सर्जन को घटाने का दावा करती है. यह तकनीक भारत जैसे देशों के लिए तेल आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है.
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अब पेट्रोल-डीजल नहीं, 'पानी' से चलेंगी गाड़ियां? मोनाको की कंपनी का बड़ा दावा!
पेट्रोल-डीजल नहीं

वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच एक विदेशी कंपनी ने ऐसा दावा किया है जिसने सबका ध्यान खींच लिया है. मोनाको की कंपनी FOWE Eco Solutions ने एक ऐसी तकनीक पेश करने का दावा किया है, जिसकी मदद से गाड़ियां और औद्योगिक मशीनें कम ईंधन में ज्यादा काम कर सकती हैं. कंपनी का कहना है कि इस तकनीक में पानी का इस्तेमाल करके ईंधन की खपत 10% तक कम की जा सकती है.

भारत के लिए क्यों है यह खास?

यह प्रस्ताव भारत के लिए एक नाजुक समय में आया है, जब देश अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में ईंधन बचाने वाली किसी भी तकनीक का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और रुपये पर पड़ता है. इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ईंधन बचाने पर जोर दे चुके हैं.

कैसे काम करती है यह अद्भुत तकनीक?

कंपनी के मुताबिक, उसकी पेटेंट तकनीक “कैविटेक फ्यूल इमल्शन” ईंधन और पानी को खास तरीके से मिलाती है. इससे ईंधन के अंदर पानी की बेहद छोटी बूंदें बनती हैं, जो जलने के दौरान कण के अंदर “माइक्रो एक्सप्लोजन” पैदा करती हैं. इस प्रक्रिया से ईंधन ज्यादा बेहतर तरीके से जलता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है और धुआं भी कम निकलता है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस तकनीक के लिए इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती. साथ ही इसका इस्तेमाल बिना मशीन बंद किए हुए भी किया जा सकता है.

ईंधन बचत और प्रदूषण घटाने का दावा

कंपनी और स्वतंत्र परीक्षण आंकड़ों के मुताबिक, इस तकनीक से बॉयलर और समुद्री इंजनों में 6-10% तक ईंधन बचत देखी गई है. भारत के कुछ रिफाइनरी और इस्पात संयंत्रों में भी परीक्षण किए गए, जिनमें ईंधन की बचत 3.6% से 6% तक दर्ज की गई.

FOWE का कहना है कि इससे NOx और SOx जैसे हानिकारक उत्सर्जन में भी 40% तक कमी लाई जा सकती है. साथ ही बॉयलर और भट्टियों के अंदर गंदगी कम जमा होती है, जिससे रखरखाव का खर्च भी घट सकता है.

अभी कहां हो रहा है इस्तेमाल?

हालांकि, यह तकनीक अभी बड़े स्तर पर आम वाहनों में इस्तेमाल नहीं हो रही है. फिलहाल इसका परीक्षण औद्योगिक इकाइयों, जहाजों और बिजली संयंत्रों में किया जा रहा है. वहीं, एक्सपर्टों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो आने वाले दिनों में ईंधन बचत के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है.

Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor

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