टाटा ट्रस्ट विवाद में वेणु श्रीनिवासन ने दिया इस्तीफा, मेहली मिस्त्री की कानूनी चुनौती के बीच बड़ा कदम
टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया। मेहली मिस्त्री की योग्यता पर उठाई गई कानूनी आपत्ति के बीच यह कदम आया है। जानिए पूरा विवाद और ट्रस्ट की पृष्ठभूमि।
टाटा समूह से जुड़े प्रमुख ट्रस्टों में एक नया विवाद सामने आया है। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस और टाटा ट्रस्ट्स के सात ट्रस्टों के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने शनिवार को बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन से अपना इस्तीफा दे दिया। आधिकारिक रूप से उन्होंने अन्य व्यावसायिक जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं का हवाला दिया, लेकिन यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने उनकी और विजय सिंह की ट्रस्टी योग्यता को कानूनी रूप से चुनौती दी है।
मेहली मिस्त्री का कानूनी दांव और आपत्ति का आधार
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष दायर अपने आवेदन में मेहली मिस्त्री ने दावा किया कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ट्रस्ट डीड के नियमों के अनुसार योग्य नहीं हैं। उन्होंने ट्रस्ट डीड के क्लॉज 6 और 18 का हवाला दिया, जिसमें अयोग्य ट्रस्टी को कानूनी रूप से 'मृत' माना जाना चाहिए। मिस्त्री की मुख्य आपत्ति यह है कि दोनों पदाधिकारियों के पास मुंबई का स्थायी निवास नहीं है, जो ट्रस्टी बनने की बुनियादी शर्तों में शामिल है।
मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर से मामले की स्वतः संज्ञान जांच शुरू करने और सभी मौजूदा ट्रस्टियों से अपनी योग्यता की पुष्टि के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने की अपील की है। यह विवाद टाटा ट्रस्ट्स के आंतरिक गठन और शासन व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चाओं को और गहरा कर रहा है।
वेणु श्रीनिवासन का इस्तीफा: व्यावसायिक व्यस्तताएं या विवाद का प्रभाव?
वेणु श्रीनिवासन ने इस्तीफा देते हुए कहा कि उनकी अन्य व्यावसायिक जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं, इसलिए वे इस ट्रस्ट के कामकाज में पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि, कई सूत्रों के अनुसार यह कदम मेहली मिस्त्री की आपत्ति के ठीक बाद उठाया गया। श्रीनिवासन लंबे समय से टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े रहे हैं और उन्हें स्वर्गीय रतन टाटा द्वारा ट्रस्टी पद पर लाया गया था।
उनका इस्तीफा टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में चल रहे कुछ मतभेदों को उजागर करता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मेहली मिस्त्री की ट्रस्टी पदावधि के नवीनीकरण पर भी विवाद हुआ था, जिसमें वेणु श्रीनिवासन, नोएल टाटा और विजय सिंह की भूमिका चर्चा में रही।
बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट: इतिहास और उद्देश्य
बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी। यह टाटा ट्रस्ट्स का एक सहयोगी ट्रस्ट है, जो मुख्य रूप से गुजरात के नवसारी क्षेत्र में पारसी और सामुदायिक कल्याण पर केंद्रित है। ट्रस्ट का कार्यक्षेत्र शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक फैला हुआ है।
टाटा ट्रस्ट्स की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह संस्था सर रतन टाटा ट्रस्ट के साथ अपना निदेशक मंडल साझा करती है। वर्तमान में इसके ट्रस्टी बोर्ड में नोएल एन टाटा (चेयरमैन), वेणु श्रीनिवासन (वाइस चेयरमैन), विजय सिंह (वाइस चेयरमैन), जिमी एन टाटा, दारियस खांबाता और जहांगीर एचसी जहांगीर जैसे नाम शामिल हैं। यह ट्रस्ट टाटा समूह की परोपकारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और टाटा संस में समूह की हिस्सेदारी को प्रभावित करने वाले बड़े फैसलों में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाता है।
टाटा ट्रस्ट्स में चल रहे विवादों का व्यापक संदर्भ
यह घटना टाटा ट्रस्ट्स में हाल के वर्षों में देखे गए कुछ आंतरिक मतभेदों की कड़ी है। टाटा ट्रस्ट्स टाटा समूह की मूल कंपनियों में प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं और देश की सबसे बड़े परोपकारी संस्थाओं में शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्टियों की योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और शासन संबंधी मुद्दे अक्सर चर्चा में आते रहते हैं।
मेहली मिस्त्री की चुनौती 1923 के ट्रस्ट डीड पर आधारित है, जो ट्रस्टी पद के लिए विशिष्ट योग्यताएं तय करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ट्रस्ट्स की पारदर्शिता और अनुपालन को लेकर आगे कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर सकता है।