भारत में फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति: किसानों की बल्ले-बल्ले, तेल आयात में कटौती!

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का अनावरण किया, जो किसानों की आय बढ़ाने और देश के ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Darshan Jat
Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor
Jun 7, 2026 • 7:21 PM  1  0
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Darshan Jat
2 hours ago
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति: किसानों की बल्ले-बल्ले, तेल आयात में कटौती!
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का अनावरण किया, जो किसानों की आय बढ़ाने और देश के ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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भारत में फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति: किसानों की बल्ले-बल्ले, तेल आयात में कटौती!

भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठा लिया है। हमारे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी जी ने गुरुवार को नई दिल्ली में मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित देश के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारम्भ किया। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी भी मौजूद थे। यह सिर्फ एक नई गाड़ी नहीं, बल्कि हमारे देश के लिए ऊर्जा बदलाव के एक नए युग की शुरुआत है!

क्या है ये फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बड़े कमाल के होते हैं। ये E20 से लेकर E100 तक, इथेनॉल और पेट्रोल के किसी भी मिश्रण पर चल सकते हैं। सोचिए, इससे कितनी आसानी होगी! हरदीप सिंह पुरी जी ने बताया कि भारत में करीब 37 लाख यात्री वाहन हैं, और अगर इस क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो इथेनॉल आधारित परिवहन को एक नई रफ्तार मिलेगी।

ऊर्जा सुरक्षा और भारत की मज़बूत रणनीति

मंत्री जी ने ये भी बताया कि कैसे सैन्य संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के एलपीजी आयात का लगभग 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था। इसके बावजूद भारत ने 1.4 अरब की आबादी वाले देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी तेल की किल्लत नहीं हुई और लोग बेफिक्र होकर सड़क व हवाई यात्रा करते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि गलत सूचना फैलाकर कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन समय पर नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी प्रबंधन से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी ऊर्जा रणनीति तीन मुख्य बातों पर टिकी है: उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता। इन तीनों के बीच संतुलन बनाए रखने की खूब सराहना की गई। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी। देश ने एलपीजी उत्पादन क्षमता को संकट से पहले के स्तर की तुलना में काफी बढ़ाया है और प्राकृतिक गैस व सीएनजी की आपूर्ति विस्तार पर भी कार्य किया है। अच्छी बात ये है कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में दुनिया के कई देशों की तुलना में कम वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का भी उल्लेख किया।

इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम: एक बड़ी सफलता

सतत विकास पर बोलते हुए हरदीप सिंह पुरी जी ने कहा कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा परिवर्तन की सबसे सफल पहलों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में इथेनॉल मिश्रण 1.5% से भी कम था, जो 2025-26 में बढ़कर 20% तक पहुंच गया है। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।

इथेनॉल की खरीद भी 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,040 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है, जबकि उत्पादन क्षमता 421 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। इसका सीधा फायदा ये हुआ है कि कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, उत्सर्जन में कमी आई है और सबसे बढ़कर, हमारे किसानों की आय में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

किसानों की आय में बंपर इजाफा!

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों से किसानों को 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। ये वाकई में एक गेम चेंजर है! इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा हो रहा है, बल्कि हमारे अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। यह दिखाता है कि कैसे सही नीतियों से देश और किसान, दोनों की तरक्की हो सकती है।

Darshan Jat Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor

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